आज ही के दिन लहू था बिखरा पुलवामा की माटी में। आज ही के दिन लहू था बिखरा पुलवामा की माटी में।
मौसम...। मौसम...।
शरद पुनो...। शरद पुनो...।
बरसो घन ज़ोर - ज़ोर बरसो घन ज़ोर - ज़ोर...! बरसो घन ज़ोर - ज़ोर बरसो घन ज़ोर - ज़ोर...!
मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ उसे बखूबी निभाना तुम...! मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ उसे बखूब...
आदर्श संस्कार अपनी अमीरता है देश की संस्कृति को बचाना है ! आदर्श संस्कार अपनी अमीरता है देश की संस्कृति को बचाना है !